MIT के गणितज्ञ ने की छठे सामूहिक विलोपन की भविष्यवाणी
आज के इस युग में मानव जाति जितनी गति से विकास की ओर अग्रसर हो रहा है, उतनी ही तेजी से वह धरती को छति पहुंचाता चला जा रहा है। इसी का यह परिणाम है की हम एक महाविनाश की ओर बढ़ रहे हैं । बताया जाता है की धरती से पांच बार जीवन का विनाश हो चूका है । इसका मतलब यह है की इसका सामूहिक विलोपन हो चूका है । और अब हम छठे बार सामूहिक विलोपन की ओर बढ़ रहे हैं जो कि इस पृथ्वी पर कभी भी हो सकती है। जो की हालही शोध में इसका खुलाशा हुआ है।
इस बार करीब 540 मिलियन वर्षों के बाद यह होने जा रहा है जो सामूहिक विलोपन करोड़ों अरबों वर्षों के बाद होता है । माना जा रहा है की अगली सदी के समाप्त होने से पहले ही ऐसा हो सकता है । धरती के ऊपर स्थित कार्बन चक्र के गणितीय विश्लेषण के बाद इस तरह की भविष्यवाणी की गयी है । क्योंकि जिस तरह से आज के इस रोजमर्रा के दिनों में इतने सारे जगहों से वायुमंडल को प्रदूषित किया जाता है जिनको शायद गिना भी न जा सकता है । जिसके कारण वायुमंडल में स्थित ओजोन परत भी धीरे-धीरे छतिग्रस्त हो रहा है । जो सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों को रोकती है जिससे की त्वचा के कैंसर इत्यादि जैसे बीमारी हम तक नही आ पाती किन्तु यह परत धीरे- धीरे कर समाप्त हो रहा है जिससे खतरा और भी बढ़ गया है ।
भू-भौतिकशास्त्री डेनियल रॉथमैन के अनुशार 31 पहले से स्थापित कार्बन आइसोटोपिक घटनाओं का अध्ययन करते हुए कार्बन-12 और कार्बन-13 आइसोटाइप की जांच धरती के इतिहास में झांककर की ।
इस बार करीब 540 मिलियन वर्षों के बाद यह होने जा रहा है जो सामूहिक विलोपन करोड़ों अरबों वर्षों के बाद होता है । माना जा रहा है की अगली सदी के समाप्त होने से पहले ही ऐसा हो सकता है । धरती के ऊपर स्थित कार्बन चक्र के गणितीय विश्लेषण के बाद इस तरह की भविष्यवाणी की गयी है । क्योंकि जिस तरह से आज के इस रोजमर्रा के दिनों में इतने सारे जगहों से वायुमंडल को प्रदूषित किया जाता है जिनको शायद गिना भी न जा सकता है । जिसके कारण वायुमंडल में स्थित ओजोन परत भी धीरे-धीरे छतिग्रस्त हो रहा है । जो सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों को रोकती है जिससे की त्वचा के कैंसर इत्यादि जैसे बीमारी हम तक नही आ पाती किन्तु यह परत धीरे- धीरे कर समाप्त हो रहा है जिससे खतरा और भी बढ़ गया है ।
भू-भौतिकशास्त्री डेनियल रॉथमैन के अनुशार 31 पहले से स्थापित कार्बन आइसोटोपिक घटनाओं का अध्ययन करते हुए कार्बन-12 और कार्बन-13 आइसोटाइप की जांच धरती के इतिहास में झांककर की ।
बेहद बुरी खबर
रॉथमैन की बातों पर भरोसा करें तो, इस पृथ्वी का महाविनाश बहुत ही नजदीक आ गया है क्योंकि वातावरण में कार्बन-डाईऑक्साइड की मात्रा इतनी अधिक हो चुकी है की महाविनाश कभी भी दस्तक दे सकता है । कार्बन-डाईऑक्साइड की मात्रा बहुत ही बढ़ गया है जिससे वर्ष 2100 तक 310 gigatan तक पहुच सकता है । रॉथमैन कहते हैं की यदि इस पर रोकने के लिए कोई उपाय नही किये गए तो इसके भयावह परिणामों से दुनिया को कोई भी ताकत नहीं बचा पायेगा । सीधे तौर पर कहा जाए तो मानव जीवन को बचाना एक चुनौती के बराबर है ।
दूभर हो जाएगा जीना
हालांकि रॉथमैन का कहना है की यह इतनी जल्दी भी नहीं होने वाला है लेकिन मानव को अपने भविष्य को संवारने के लिए पहले से ही मेहनत करना पड़ेगा । यदि इसी तरह कॉर्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ती रही तो, भविष्य में मानवजनों का जीना दूभर हो जाएगा । यह स्थिति भी किसी महाविनाश से कम नहीं है ।






